*उदय होते सूर्य को अर्ध्य का विशेष फल——–महराजगंज,छठ महोत्सव के आखिरी यानी चौथे दिन व्रत का पारण किया*

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उदय होते सूर्य को अर्ध्य का विशेष फल——–महराजगंज,छठ महोत्सव के आखिरी यानी चौथे दिन व्रत का पारण किया जाता है। इसी के साथ नहाय खाय से प्रारंभ हुए व्रत का समापन हो जाता है। व्रत के पारण के दिन उदय होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। हर वर्ष की भांति इस बार में लोगों में इस पर्व को मनाने को लेकर काफी उत्साह है लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते लोग बाहर निकलते समय सावधानी भी बरत रहे हैं। इस विशेष पर्व के लिए बड़ी संख्या में लोग समुद्र, नदियों और सरोवरों के किनारे पर इकट्ठा होते हैं। छठ पर्व के समापन के अवसर पर सूर्य को जल समर्पित करने के साथ पूजन सामग्री समर्पित की जाती है। व्रत को समाप्त करने को पारण कहा जाता है। सूर्य की लालीमा आसमान में छाते ही श्रद्धालु सूर्य तो अर्घ्य देना प्रारंभ कर देते हैं। और सूर्यदेव से सुख-संपत्ति, आरोग्य और धन-संपदा की कामना के साथ अपने घर को प्रस्थान कर जाते है माता सीता ने भी छठ पर की थी विशेष पूजा, इस पाप से मिली थी मुक्ति।
ऐसे करें भगवान सूर्य की आराधना
छठ महोत्सव के चौथे दिन सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ के लिए बनाया गया विशेष पकवान ठेकुआ को वितरित किया जाता है और उसको व्रती और परिवारजन ग्रहण करते है। छठ महोत्सव के समापन के अवसर पर छठी मैया की पूजा की जाती है। इस अवसर पर छठी मैया से जिन दंपत्तियों को संतान नहीं है वो संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। जिनके बच्चे है वो अपने बच्चों की उन्नति, आरोग्य और लंबी उम्र की कामना करते हैं। छठ व्रत के समापन अवसर पर छठी मैया और सूर्य देव से व्रत की सफलता की कामना की जाती है। छठी देवी को नन्हे-मुन्ने बच्चों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता हैं। संतान की अभिलाषा रखने वाले दंपत्ति को देवी संतान सुख देती है।

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