*औद्योगिक विकास तथा पर्यावरण प्रदूषण ———– औद्योगिक*

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औद्योगिक विकास तथा पर्यावरण प्रदूषण ———– औद्योगिक विकास तथा पर्यावरण प्रदूषण में सीधा सम्बन्ध है। औद्योगिक प्रदूषण में जल, वायु तथा मृदा प्रदूषण विशेष उल्लेखनीय हैं। औद्योगिक नगरों में प्रदूषण संक्रामक रोगों का आधार बनता जा रहा है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली विषैली गैसें, अपशिष्ट पदार्थ एवं प्रदूषित जल, मृदा, वायु एवं जल को मानवीय जीवन की आवश्यकताओं के लिये अनुपयुक्त बनाते जा रहे हैं, जिनका दुष्प्रभाव मानवीय स्वास्थ्य पर पड़ता है।औद्योगिक विकास की भूमिका राष्ट्रीय विकास में महत्त्वपूर्ण निर्णायक तत्व है। इसके माध्यम से मुख्यतः संरचनात्मक विविधता, आधुनिकता तथा स्वनिर्भरता के उद्देश्यों की पूर्ति सम्भव होती है। वर्तमान औद्योगिक युग में विश्व का प्रत्येक विकसित एवं विकासशील राष्ट्र अपना अधिकाधिक औद्योगीकरण करने हेतु प्रयत्नशील है। औद्योगिक विकास आर्थिक विकास का एक मुख्य अंग है, जिसका उद्देश्य उत्पादन के साधनों की कुशलता में वृद्धि द्वारा जीवन स्तर को ऊँचा उठाना है। औद्योगिक विकास के बिना ना तो किसी राष्ट्र के वासियों का जीवन स्तर ऊँचा उठ सकता है और न ही ऐसा राष्ट्र अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका का सन्तुलित निर्वाह कर सकता है। इस प्रकार औद्योगिक विकास एक युग धर्म बन चुका है।

नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य, जो खनिज संसाधन सम्पन्न राज्य है, में औद्योगीकरण की यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उद्योग धंधों का दिनोंदिन विस्तार हो रहा है तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित उद्योगों से खनिज आधारित उद्योगों की ओर उन्मुख हो रही है। प्रदेश में फैली अनन्त भूगर्भ सम्पदा आर्थिक कायाकल्प एवं सामाजिक आर्थिक विकास का एक प्रमुख साधन है। क्षेत्र विशेष की आर्थिक प्रगति उस क्षेत्र में उपलब्ध प्राकृतिक स्रोतों के पूर्ण दोहन पर निर्भर करती है। कृषि प्रधान एवं आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र लौह खनिज चुना पत्थऱ व कोयले के विशाल भंडार उपलब्ध है।खनिज व वनोपज संम्पदा से संम्पन्न इस देश मे औद्योगिक विकास की अपार सम्भावनाये विद्यमान है।औद्योगिक विकास तथा पर्यावरण प्रदूषण में सीधा सम्बन्ध है।औद्योगिक प्रदूषण में जल,वायु तथा मृदा प्रदूषण बिशेष उल्लेखनीय है।औद्योगिक नगरों में प्रदूषण संक्रमित रोगों का आधार बनता जा रहा है।औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली विषैली गैसे, अपशिष्ट पदार्थ एवं प्रदूषित जल,मृदा, वायु एवं जल को मानवीय जीवन की आवश्यकताओं के लिए अनुपयुक्त बनता जा रहा है।जिसका दुष्प्रभाव मानवीय जीवन पर पड़ता है।कारखानों व ताप विद्धुत इकाइयों से निकलने वाली कार्बनडाई आक्साइड गैस वायु मण्डल के तापमान को बढ़ाती जा रही है,जो जैव जगत के लिए संकट की सूचना है।

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