*कृषि अपशिष्ट अपघटन में वेस्ट डी कंपोजर की भूमिका अहम:के0 एन0 द्विवेदी ——- शिकारपुर, महराजगंज: पराली सहित सभी प्रकार*

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कृषि अपशिष्ट अपघटन में वेस्ट डी कंपोजर की भूमिका अहम:के0 एन0 द्विवेदी ——- शिकारपुर, महराजगंज: पराली सहित सभी प्रकार के रबी,खरीफ एवं जायद किस्म के फसल अवशेषों के किसानों द्वारा धड़ल्ले से जलाए जाने से समूचे भारत देश की आबोहवा खराब हो चुकी है। पर्यावरण प्रदूषित हो चुका है। फसल अवशेषों को जलाए जाने से रोकने हेतु वेस्ट डी कंपोजर कारगर साबित हो रहा है। कृषि अपशिष्ट अपघटन में इसकी भूमिका अब अहम हो गई है। यह बातें राजकीय कृषि बीज भंडार घुघली द्वारा आयोजित पराली प्रवंधन विषयक संगोष्ठी में घुघली के सहायक विकास अधिकारी कृषि केदारनाथ द्विवेदी ने कही।इस अवसर पर राजकीय कृषि बीज भंडार घुघली के इंचार्ज गोपाल प्रसाद ने कहा कि किसान भाई अपने खेतों की उर्वरा शक्ति बचाए रखने हेतु पराली सहित सभी प्रकार के फसल अवशेषों को जलाए जाने से बचें।किसानों को जागरूक करते हुए कृषि इकाई घुघली के प्राविधिक सहायक धीरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि एक बोतल वेस्ट डी कंपोजर से 30 दिन में 1 लाख मैट्रिक टन जैव अपशिष्ट को अपघटित करके खाद तैयार की जा सकती है।कार्यक्रम में बीटीएम संजय गोविंद राव,एटीएम अरविंद चतुर्वेदी एवं एटीएम अरविंद पटेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस मौके पर सुनील कुमार, राजेश कुमार, दुर्गादत्त पांडेय, रमेशचंद पटेल,अनिल कुमार,हीरालाल,ध्रुवनारायण, जयंती देवी, सरिता देवी आदि किसान मौजूद थे।

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