*कोरोना का कहर: अस्पतालों में बेड फुल, कोई गाड़ी में तो कोई पेड़ के नीचे करा रहा इलाज*

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*कोरोना का कहर: अस्पतालों में बेड फुल, कोई गाड़ी में तो कोई पेड़ के नीचे करा रहा इलाज*
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*गोरखपुर*/कोरोना महामारी जानलेवा बना हुआ है। इस वायरस के कारण अपनों की उखड़ रही सांसों को बचाने के लिए तीमारदार शिद्दत से जुटे हैं। अस्पतालों में बेड फुल हैं। ऐसे में तीमारदारों को जहां जगह मिल रही है। वहां अपनों के सांसों की डोर संभालने की कोशिश कर रहा है। अस्पतालों के बाहर गाड़ियों में लोगों का इलाज चल रहा है। इतना ही नहीं तीमारदार निजी अस्पतालों के बाहर और घरों पर भी इलाज कर अपनों की जान बचाने के लिए ढाल बन गए हैं।
*बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाहर गाड़ियों में चल रहा इलाज*
मिली जानकारी मुताबिक बीआरडी मेडिकल कालेज में बेड की कमी होने से मरीजों की भर्ती जल्दी नहीं हो पा रही है। भर्ती के इंतजार में तीमारदार मरीजों की टूटती सांसों को थामें हुए हैं। परिजन गाड़ियों में ही संक्रमितों का इलाज कर रहे हैं। बेलघाट की रहने वाली विमला देवी संक्रमित होने के बाद हालत खराब हुई। गुरुवार को परिजन ईलाज के लिए निजी नर्सिंग होम ले गए। वहां से महिला की हालत बिगड़ी। उन्हें बीआरडी रेफर कर दिया। बीआरडी में बेड खाली नहीं मिला। ऐसे में करीब चार से पांच घंटे तक परिजन बीआरडी के बाहर एम्बुलेन्स में महिला का इलाज करते रहे। ऐसे करीब एक दर्जन संक्रमितों को रोजाना परिजन बीआरडी के बाहर घंटों इलाज करते रहते हैं।
*ऑक्सीजन की आस में पीपल के पेड़ के नीचे लिटा दिया मरीज को*
झुमिला संवाददाता के मुताबिक ददरा निवासी आजाद हिन्द पासवान(48 वर्षीय) को सांस की बीमारी है। उनका गोला बाजार में निजी चिकित्सक के पास इलाज चल रहा था। परिजन उन्हें भर्ती कराने के लिए प्रयास किए। किसी अस्पताल में बेड नहीं मिला। निराश परिजन उन्हें वापस घर ले आए। गुरुवार की रात उनकी तबीयत बिगड़ गई। गांव पर रिटायर स्वास्थ्यकर्मी सुधांशु श्रीवास्तव पीपल के पेड़ के नीचे रखकर इलाज शुरू किया। इस दौरान पुत्र शैलेश पासवान भी साथ में मौजूद रहे। पिछले 24 घंटे से उनकी हालत स्थिर है। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ गया है।
*प्राइवेट अस्पताल के बाहर टेम्पू में चल रहा इलाज*
सहजनवा संवाददाता के मुताबिक कटसहरा में निजी अस्पतालों में भी बेड फुल हो गया है। यहां बुखार और सांस फूलने के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। अस्पतालों में बेड फुल होने पर यहां तख्ते और आटो में मरीजों का इलाज हो रहा हैं। बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर पर बकायदा तख्त लगाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है। सुई लगाई जा रही है। अस्पताल के बाहर वाहनों से आये मरीजों का इलाज निजी अस्पताल के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ आटो में ही कर रहे हैं। यह नजारा यहां रोजाना दिख रहा है। इन अस्पतालों में कोविड के नियमो का पालन नहीं हो रहा है। अस्पताल न ही थर्मल स्कैनर है और न ही सेनेटाइजर।

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