*चलनी में चांद देखकर की पति की लंबी उम्र की कामना, महिलाएं साज श्रृंगार कर मनाई करवाचौथ का त्यौहार।* *अवनीश शंकर राय की रिपोर्ट*

0
65

*चलनी में चांद देखकर की पति की लंबी उम्र की कामना, महिलाएं साज श्रृंगार कर मनाई करवाचौथ का त्यौहार।*
*अवनीश शंकर राय की रिपोर्ट*

देवरिया। आज पूरे देश में करवाचौथ का त्यौहार धूमधाम से मनाया जा रहा है।यह व्रत महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु के लिए सारे दिन निर्जला रहकर रखती हैं। आज देवरिया जिले में भी करवाचौथ की धूम दिखाई दी। इस अवसर पर भुजौली कालोनी व भीखमपुर रोड में रहने वाली सुनीता देवी ने बताया कि इस व्रत की शुरूआत सुबह को घर की बुजुर्ग महिलाओं द्वारा सरगी देने के साथ होती हैं।इस दिन महिलाएं खूब सारा साज-श्रृंगार करती है,तथा सारे दिन निर्जल रहकर अपनी पति की लंबी आयु के लिए दुआ मांगती है।साथ ही यातायात माह को देखते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है,इसलिये हल्की गति से ही वाहन चलाये तथा दो पहिया वाहन चलाते समय सदैव हेलमेट का इस्तेमाल करे।
वही भुजौली कालोनी की रहने वाली गीतांजली ने कहा कि इस समय कोरोना काल चल रहा है,इसलिए घर से निकलते समय मास्क का प्रयोग करें तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें क्योंकि आपको अपने साथ अपने परिवार को भी सुरक्षित रखना है।
आपको बता दें कि शाम होते ही सुहागिनें सजने संवरने लगीं। जैसे ही रात आठ बजे के बाद चंद्रमा की झलक दिखी, वैसे ही पूजन शुरू हो गया। व्रती सुहागिनों ने भगवान शिव, मां पार्वती व गणेश का पूजन कर पति के दीर्घायु व अखंड सौभाग्य की कामना की, अर्घ्य देकर पति की लम्बी उम्र की कामना की।

शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक करवाचौथ का त्यौहार धूमधाम से महिलाओं ने मनाई।

शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में यह व्रत रखा गया। व्रत को लेकर नव विवाहिताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। सुबह स्नान ध्यान से यह व्रत शुरू हुआ। उसके बाद पूरा दिन महिलाएं निराजल व्रत रहीं। दोपहर में शहर के मालवीय रोड स्थित सत्यनारायण मंदिर, हनुमान मंदिर, पुलिस लाइन शिव मंदिर आदि स्थानों पर भगवान शिव, पार्वती व चौथ माता की विधि-विधान से पूजा की। महिलाओं ने आपस में लोक परंपरा की कथाएं भी सुनी जिसमें पौराणिक कथा में एक पतिव्रता स्त्री थी, जिसका नाम करवा था। वह अपने पति से बहुत प्रेम करती थी। पतिव्रता होने से उसके अंदर एक दिव्यशक्ति विद्यमान हो गई थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया था, तभी एक मगरमच्छ ने उसे पकड़ लिया। करवा को जब इसकी सूचना मिली तो उसने यमराज का आह्वान किया। उसने यम देव से पति को वापस करने तथा मगर को यमलोक भेजने का आग्रह किया। साथ ही उसने यम देव को चेतावनी भी दी। यदि उसके पति को कुछ हो गया तो वह अपनी पतिव्रता शक्ति से यमलोक तथा यमराज दोनों का ही विनाश कर देगी। उस पतिव्रता स्त्री की चेतावनी तथा पतिव्रता शक्ति से यमराज इतना भयभीत हो गए कि उन्होंने उसके पति को वापस घर भेज दिया और मगरमच्छ को यमलोक में भेज दिया। यह मान्यता है कि उस दिन के बाद से ही कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत मनाया जाने लगा। कार्तिक चतुर्थी व्रत बाद में करवा चौथ व्रत के नाम से प्रसिद्ध हो गया। दूसरी कथा सत्यवान व सावित्री की भी सुनी गई। रात में चंद्रोदय के समय व्रती महिलाओं ने चन्द्रमा भगवान की अक्षत, पुष्प रोली आदि से पूजा की।

चांद देखकर, ली सेल्फी

चंद्रमा का दर्शन कर महिलाओं ने पति के साथ सेल्फी ली। छत पर परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। सभी ने करवा चौथ को उत्साह के साथ मनाया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here