*जयमंगल पांडे और नादिर अली का बलिदान==*

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*🕉🕉🕉🕉हरदिनपावन=== आजकादिनविशेष========== ======वीरगति दिवस====== ======(04.10.1857)====== जयमंगल पांडे और नादिर अली का बलिदान==*
बैरकपुर छावनी में विद्रोह के बाद देश की अन्य छावनियों में भी क्रान्ति-ज्वाला सुलगने लगी।बिहार में भी सैनिक क्रोध से जल रहे थे.13जुलाई को दानापुर छावनी में सैनिकों ने क्रान्ति का बिगुल बजाया,तो 30 जुलाई को रामगढ़ बटालियन के जवानों ने भी हथियार उठा लिये।सूबेदार जयमंगल पाण्डे उन दिनों रामगढ़ छावनी में तैनात थे।उन्होंने अपने साथी नादिर अली को तैयार किया और फिर वे दोनों 150सैनिकों को साथ लेकर राँची की ओर कूच कर गये।बड़ी आयु के बाबू कुँवरसिंह जगदीशपुर में अंग्रेजों से लोहा ले रहे थे।बड़ी आयि में भी उनका जीवट देखकर सब क्रान्तिकारियों ने उन्हें अपना नेता मान लिया.11सित.1857को ये दोनों अपने जवानों के साथ जगदीशपुर की ओर चल दिये।वे कुडू,चन्दवा, बालूमारथ होते हुए चतरा पहुँचे।तब चतरा का डिप्टी कमिश्नर सिम्पसन था।उसे यह समाचार मिल गया कि दोनों अपने क्रान्तिकारी सैनिकों के साथ फरार हो चुके हैं।उन दिनोंअंग्रेजअधिकारी बाबू कुँवरसिंह से बहुत परेशान थे।उन्हें लगा कि इन दोनों को यदि अभी न रोका गया, तो आगे चलकर ये भी सिरदर्द बन जाएंगे।उसने मेजर इंगलिश के नेतृत्व में सैनिकों का एक बड़ा दल भेजा।इतना ही नहीं, उनके पास आधुनिक शस्त्रों का बड़ा जखीरा भी था।इधर वीर जयमंगल पाण्डे और नादिर अली को भी सूचना मिल गयी कि मेजर इंगलिश अपने भारी दल के साथ उनका पीछा कर रहा है।अतः उन्होंने चतरा में जेल के पश्चिमी छोर पर मोर्चा लगा लिया।वह दो अक्तूबर,1857 का दिन था।थोड़ी देर में ही अंग्रेज सेना आ पहुँची.जयमंगल पाण्डे के निर्देश पर सब सैनिक मर मिटने का संकल्प लेकर टूट पड़े;पर इधर संख्या और अस्त्र शस्त्र दोनों ही कम थे, जबकि दूसरी ओर ये पर्याप्त मात्रा में थे।फिर भी दिन भर चले संघर्ष में 58अंग्रेज सैनिक मारे गये।उन्हें कैथोलिक आश्रम के कुँए में हथियारों सहित फेंक दिया गया।बाद में शासन ने इस कुएँ को ही कब्रगाह बना दिया।
इधर अधिकांश सैनिकों ने वीरगति पायी. *03अक्टू.1857को जयमंगल पाण्डे और नादिर अली पकड़े गये।अंग्रेज अधिकारी जनता में आतंक फैलाने हेतु- 04अक्तू.1857को पन्सीहारी तालाब के पास एक आम के पेड़ पर दोनों को खुलेआम फाँसी दे दी।इस तालाब को फाँसी तालाब,मंगल तालाब,हरजीवन तालाब आदि अनेक नामों से पुकारा जाने लगा।आजादी बाद वहाँ एक स्मारक बनाया।उस पर लिखा है==================जयमंगल पाण्डेय नादिर अली दोनों सूबेदार रे,दोनों मिल फाँसी चढ़े हरजीवन तालाब रे।।सादर वंदन। नमन।🙏🙏🙏🙏*

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