*दिनांक 31 अक्टूबर 2020 को माननीय प्रदेश प्रभारी और माननीय जिला अध्यक्ष जयप्रकाश पटेल जी के निर्देशन में नेपालापुर चौराहे पर हमारे प्रमुख सरदार*

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आज दिनांक 31 अक्टूबर 2020 को माननीय प्रदेश प्रभारी और माननीय जिला अध्यक्ष जयप्रकाश पटेल जी के निर्देशन में नेपालापुर चौराहे पर हमारे प्रमुख सरदार बल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धा के सुमन अर्पित किए । इस आयोजन में माननीय प्रदेश सचिव सोनी गंगवार , माननीय राष्ट्रीय सचिव करुणा शंकर पटेल जिलाउपाध्यक्ष प्रेमचंद पटेल , युवाओ की धड़कन विनोद गिहार जी , अमर सिंह वर्मा प्रधान बशारा विधानसभा अध्यक्ष महोली , सेवकराम वर्मा , ताराचंद पटेल प्रदेश सचिव किसान मंच , शोभा लोधी , पूजा सिंह वर्मा , गोल्डी देवी , सुधा राज, राजेश कुमार वर्मा , राम सनेही गुप्ता , राम मनोज मौर्य, रवि मौर्या , वीरेंद्र पटेल , आसिफ अली , निर्मल कुमार , और अन्य सक्रिय पदाधिकारी और सैकड़ो सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद रहे । जिसमे हमारे सभी कार्यकर्ताओं ने पदाधिकारियो ने सरदार पटेल जी और पार्टी के विषय मे बात रखी ,अपनी पार्टी की विचारधारा बतायी जिसमे सेकड़ो लोग शामिल किया।

पार्टी ने प्रदेश प्रभारी जी ने और जिलाध्यक्ष जयप्रकाश पटेल जी ने बताया कि –

अखंड भारत के राष्ट्र निर्माता लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 145 वीं जयंती के शुभ अवसर पर शत शत नमन। सरदार पटेल एक किसान परिवार में गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर सन 1875 को जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत की पहले गृहमंत्री और पहले उप प्रधानमंत्री थे उन्होंने गांधी जी के साथ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया महात्मा गांधी के कार्यों व आदर्शों से प्रेरित होकर पटेल भी देश की आजादी के लिए किए जा रहे संघर्ष में शामिल हो गए उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स के विरोध में खेड़ा बारडोली व गुजरात के अन्य क्षेत्रों से किसानों को संगठित किया और गुजरात में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की वह अपने लक्ष्य में सफल हुई जिसके बाद ब्रिटिश सरकार को उस वर्ष का राजस्व कर माफ करना पड़ा। इसके बाद गुजरात की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बन गये। जब महात्मा गांधी जेल में थे तब उन्होंने भारतीय झंडा फहराने को प्रतिबंधित करने वाले अंग्रेजों के कानून के खिलाफ 1923 नागपुर में सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व किया था 1937 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने 1934 और 1937 में कांग्रेश के अखिल भारतीय चुनाव प्रचार में सबसे आगे थे वही 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के आयोजन में प्रमुख नेता थे उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में प्रमुख रूप से शामिल होने के कारण पुलिस ने कैद कर लिया था और 1945 में रिहा किया था उनके जीवन से जुड़े अनेक ऐसे किससे सुनने पढ़ने को मिलते रहे हैं जिससे उनकी ईमानदारी, दृढ़, निश्चय, समर्पण, निष्ठा, और हिम्मत की मिसाल मिलती है। सरदार पटेल उस समय छोटे ही थी जब उनकी कांख में एक फोड़ा निकल आया था फोड़े का खूब इलाज कराया गया किंतु जब वह किसी भी प्रकार ठीक नहीं हुआ एक वैद्य ने सलाह दी की फोड़े को गरम सलाख से फोड़ दिया जाए तभी ही ठीक होगा आखिरकार सरदार पटेल ने स्वयं ही लोहे की सलाह को गर्म करके फोड़े पर लगा दिया जिससे वह फूट गया और कुछ ही दिनों में वह ठीक हो गया अद्भुत, साहस को देखकर पूरा परिवार और आसपास के लोग अचंभित रह गए जिसके बाद उन्हें लौह पुरुष कहा गया। सन 1909 में जब वे वकालत करते थे उस दौरान तो उनकी परायणता की मिसाल देखने को मिली जिसकी आज के युग में तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता उस समय उनकी पत्नी झाबेर बा कैंसर से पीड़ित थी और वो मुंबई में एक अस्पताल में भर्ती थी लेकिन ऑपरेशन के दौरान उनका निधन हो गया उस दिन सरदार पटेल अदालत में अपने मुवक्किल के केस की पैरवी कर रहे थे तभी उन्हें संदेश मिला अस्पताल में उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई है संदेश पढ़कर उन्होंने पत्र को चुपचाप जेब में रख लिया और अदालत में अपने मुवक्किल के पक्ष में लगातार 2 घंटे तक बहस करते रहे और आखिरकार उन्होंने अपने मुवक्किल का केस जीत लिया। यह जीतने के बाद जब न्यायाधीश सहित वहां उपस्थित अन्य लोगों को मालूम हुआ कि उनकी पत्नी का देहांत हो गया तो सभी ने सरदार पटेल से पूछा कि वह तुरंत अदालत के कारवाही छोड़कर चले क्यों नहीं गए पटेल ने जवाब दिया कि उस समय मैं अपना फर्ज निभा रहा था जिसका शुल्क मेरे मुवक्किल ने न्याय पाने के लिए मुझे दिया था और उसके साथ अन्याय नहीं कर सकता था। सरदार पटेल अमर रहे।

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