*नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेस-वे होगा चकाचक, कम लागत और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा, पूरी जानकारी -*

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*नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेस-वे होगा चकाचक, कम लागत और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा, पूरी जानकारी -*

 

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच देश के सबसे पहले एक्सप्रेस वे को एक बार फिर चकाचक करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस बार एक्सप्रेस वे को बनाने के लिए बेहद कम लागत आएगी और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि एक्सप्रेस को उखाड़कर इसके पुराने मलबे से ही नया बनाया जाना है।

बुधवार को Central Road Research Institute (सीआरआरआई) के अधिकारियों की मौजूदगी में एक्सप्रेस वे की जांच की गई है। एक्सप्रेस-वे पर हर किलेामीटर क्षेत्र में कोर कटिंग की गई। जांच के लिए नमूने सीआरआरआई की प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। Noida Authority से मिली जानकारी के मुताबिक नमूनों का परीक्षण करने के बाद सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीटयूट (सीआरआरआई) रिपोर्ट देगी। वहां से डिजाइन फाइनल होते ही इसको बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक एसपी सिंह ने बताया कि करीब 23 किलोमीटर लंबे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे की मरम्मत की जानी है। इसमें से करीब 20 किलोमीटर क्षेत्र नोएडा में आता है। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस वे की मरम्मत नई तकनीक के जरिए की जाएगी। इसके तहत 80 प्रतिशत पुराने मैटेरियल का ही प्रयोग किया जाएगा। इससे खर्चा भी कम आएगा और सड़क की ऊंचाई भी नहीं बढ़ेगी। मरम्मत का काम करने के लिए सीएस इंफ्रास्टक्चर कंपनी का चयन हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब इसकी मरम्मत के लिए डिजाइन फाइनल होना है। इसी क्रम में बुधवार को सीआरआरआई के अधिकरियों की टीम ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे का दौरा किया है। यहां पर महामाया फ्लाईओवर से परी चौक की ओर करीब 500 मीटर दूरी पर एक्सप्रेस वे की सड़क की कोर कटिंग की गई।

उन्होंने बताया कि इसके मैटेरियल को लेकर सीआरआईआई को परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। यह मैटेरियल प्रति किलोमीटर के हिसाब से लिया जा रहा है। इसके बाद डिजाइन सीआरआई से मंजूर होकर आएगा। उसी के तहत सड़क को बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि 15-20 दिन में काम शुरू हो जाएगा। मरम्मत का काम एक-एक लेन में किया जाएगा। ताकि बाकी लेन से ट्रैफिक निकलता रहे।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे छह लेन का है, जो नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ता है। यह एक्सप्रेस-वे ताज इकोनॉमिक ज़ोन, इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एविएशन हब के विस्तार के लिए बनाया गया था। इसे यमुना एक्सप्रेस वे (ताज एक्सप्रेस वे) के प्रारंभिक हिस्से के रूप में बनाया गया था। एक्सप्रेसवे 24.53 किमी (15.24 मील) लंबा है। यह 400 करोड़ की लागत से बनाया गया था। एक्सप्रेस वे का शिलान्यास उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2000 में किया था। यह एक्सप्रेस वे 2 वर्ष में बनकर तैयार हुआ और इसका का शुभारंभ तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने वर्ष 2002 में किया था।

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