*प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपने भाग्य पर भ रहा है आँसू———*

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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपने भाग्य पर भ रहा है आँसू————–फरेंदा l कोल्हुई स्थित नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपने भाग्य पर आज भी आँसू बहा रहा है। स्थापना काल के शुरुआती दिनों से ही बीमार सा दिखने वाला यह स्वास्थ्य केंद्र पहले दो जगह किराये के मकान में लुंज पुञ्ज हाल में रहा। इस के बाद यह अस्पताल पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के प्रयास से अपने भूमि पर बनी। परंतु काफी अरसे बीतने के बाद भी आज अपने भवन एवं संसाधनों के बावजूद भी बीरान सा लगता है जो चिंता का विषय बना हुआ है।
कोल्हुई उपनगर में नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की वर्ष 02/05/1999 में शिलान्यास व वर्ष 21/04/2001 में उदघाटन पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के सौजन्य से हुआ था।अस्पताल के घोषणा से लोगों में स्वास्थ्य सुविधा के प्रति आशा जगी थी कि अब लोगों को झोला छाप डॉक्टरों की शरण में नहीं जाना पड़ेगा।परंतु लोगों को यह अपेक्षा नहीं थी कि यह स्वास्थ्य केंद्र मरीजों का शोषण का केंद्र बनकर रह जाएगा l दीपावली की रात में प्रसूता को घण्टों अस्पताल के गेट पर मुब्तिला होते देख क्षेत्र वासियों का कलेजा फटने लगा है।अबउन्हेंप्रदेश के पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी याद आ रहे है।उनका सपना था कि इस नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से क्षेत्र के लोगों के लिए बेहतर सुबिधायें मुहैय्या करा कर आम जान मानस को उपचार केलिए दर दर भटकने से निजात मिलेगी।परंतु इस अस्पताल में स्टाफ की कमी के साथ साथ दवा की कमी सदैव बनी रहती है।स्टाफ की लापरवाही का प्रयाय बना यह स्वास्थ्य केंद्र मरीजों के उपेक्षा का केंद्र बना हुआ है।यहाँ के स्टाफ को इतनी सुधि नहीं कि अगर उनके परिजनों का यहाँ उपचार हो तो क्या वे संतुष्ट रहेंगे।यहाँ के शौचालय में भी अक्सर ताला लटका रहता हैl मरीजों को लगता है कि उनके लिये नहीं यह तो साहब के किसी आगंतुक के लिए सुरक्षित रखा गया है।यहाँ के तैनात चिकित्सक केंद्र पर मरीजों के उपचार करने से ज्यादा अपने आवास पर उपचार करना अच्छा समझते है।anmडिलेवरी केश पर कम ध्यान देती है,प्राइवेट ही उन्हें पसंद रहता है।यहाँ के डॉक्टर समेत सभी स्टाप को देखने मे लगता है कि ये सरकारी नौकरी के लिए नही बल्कि शासन चलाने तथा शोषण के लिए तैनाती की गई है।अब लोगो को अमर मणि की याद सताती है।अब तो समस्त स्टाप बेलगाम हो गए है।सी एम ओ महराजगंज की भी नजर नही पड़ती है कि रवैया में सुधार हो।इस सम्बंध में डॉ0सुशील कुमार गुप्ता से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि anm को सख्त हिदायत पहले दी जा चुकी है तथा पुनः उनके खिलाफ कार्यवाही के लिये उच्च अधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है लेकिन डॉक्टर के प्राइवेट चिकित्सा की जानकारी किसे दी जाय।

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