*बहादुरी पर डटा रहता किसान पर भी नही मिल पाता समस्याओ का ठोस समाधान———–*

0
65

बहादुरी पर डटा रहता किसान पर भी नही मिल पाता समस्याओ का ठोस समाधान—————महराजगंज,किसान एक ऐसी बहादुर कौम जो हर तरह की विकट से विकट परिस्थितियों में भी बिना हिम्मत हारे उनका डट कर मुकाबला करने का माद्दा रखता है, लेकिन फिर भी कुछ लोग जीवन संघर्ष के इस दौर में अपने परिवारों के कष्टों को देखकर टूट जाते हैं और वो आत्महत्या कर बैठते हैं। देश में बेहद कठिन हालात में काम करने वाले किसानों की समस्याओं की उपेक्षा सभी सरकारों के द्वारा जारी है, किसानों की उपेक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है कि देश में उद्योगपतियों ने मंदी की हालात से उत्पन्न समस्या से केंद्र सरकार को अवगत कराया, सरकार ने विकट हालात को तुरंत समझते हुए भारी मंदी की चपेट में आये उद्योगों को उबारने के लिए तत्काल कॉरपोरेट टैक्स को घटाकर उनको राहत देने का काम किया, जिससे देश के कॉरपोरेट सेक्टर को 1.45 लाख करोड़ का लाभ आने वाले समय में होगा। जबकि हमारा अन्नदाता किसान अपनी समस्याओं से परेशान होकर आत्महत्या कर लेता है, फिर भी सरकार किसानों की लंबे समय से लंबित चली आ रही विभिन्न मांगों पर समय रहते सुनवाई करके उनका स्थाई हल नहीं करती है।
यहां गौरतलब है कि सरकार के द्वारा देश के उद्योगों को यह राहत ऐसे समय में दी गई थी, जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों अन्नदाता किसान अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करवाने के लिए पैदल मार्च करके दिल्ली पहुंचे थे। फिर भी सरकार ने किसानों की झोली को खाली ही रखा, केंद्र सरकार ने पूर्व की भांति चाणक्य नीति का इस्तेमाल करते हुए, अन्नदाता को मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन देकर चतुराई से वापस घर भेज दिया। अब देखना होगा कि सरकार का किसानों की मांगों पर विचार आखिर कब तक चलता है और कब तक किसानों की मांगों पर अमल होता है। देश के अन्नदाताओं के आंदोलन के साथ इसी तरह का सफलता पूर्वक प्रयास मोदी सरकार में पहले भी हो चुका है और समय-समय पर पहले की सरकारें भी इस प्रकार के हथकंडे को अपना कर किसानों के आक्रोश को शांत करती रही हैं। देश में सरकारें बदलती रही हैं लेकिन किसानों की समस्याओं का पूर्ण स्थाई समाधान फिर भी अभी तक नहीं हो पाया है।
जबकि किसानों की मुख्य मांगें वही वर्षों पुरानी हैं, फसलों का उचित मूल्य, मौसम की मार के चलते बर्बाद फसलों का उचित मुआवजा, सरकार द्वारा तय रेट पर फसलों की खरीद सुनिश्चित करना, गन्ने का भुगतान समय पर हो, किसानों का कर्ज माफ हो, किसानों को बिजली पानी डीजल सस्ता दिया जाए, किसानों के सुरक्षित जीवन के लिए पेंशन योजना बनायी जाये, किसानों की हालत को सुधारने के लिए देश में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को जल्द से जल्द लागू किया जाये आदि हैं। किसान का आरोप है कि हम बेहद परेशान हैं लेकिन उसके बाद भी कोई भी सरकार हमारी मांगों पर कभी भी ध्यान से सहानुभूतिपूर्वक विचार करके हमारी समस्याओं का ठोस स्थाई समाधान नहीं निकालती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here