*मोजरी गांव में मकान गिराये जाने की हकीकत का राज खुला, क्या SDM ने मारी महिलाओं को लात?* *रिपोर्ट – कैलाश सिंह*

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मोजरी गांव में मकान गिराये जाने की हकीकत का राज खुला, क्या SDM ने मारी महिलाओं को लात?

महराजगंज: पंचायत चुनाव में सत्तारुढ़ दल के नेताओं को वोट नहीं दिया तो क्या जिला प्रशासन गरीबों का मकान बुलडोजर लगाकर जबरन गिरवा देगा? यदि गांव की जमीन पर अतिक्रमण बीस लोगों ने किया है तो क्या SDM सत्ताधारी नेताओं के दबाव में सिर्फ एक महिला को टॉरगेट कर उसका मकान गिरवा देंगे? क्या मोजरी गांव में मकान गिराने के लिए बाकायदे मुकदमा लिखाने और कोर्ट से कागज लाने के नाम पर षड़यंत्र रचा गया? और इसी षड़यंत्र के बाद पूरा मकान ध्वस्त करा दिया गया?
महराजगंज में अवैध निर्माण गिरवाने गए SDM को उग्र ग्रामीणों ने ईंट-पत्थर लेकर खदेड़ा, ऐसे बची जान, जानिये पूरा मामला।
ये ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब आज जिले वासी जानना चाहते हैं। इसी की पड़ताल करने ए.सी.एम न्यूज़ की टीम पहुँची मोजरी गांव में। जहां पर हैरान करने वाला मंजर है। गंवई राजनीति में पार्टी बने एसडीएम की एकतरफा मनमानी करतूत से गांव वालों का गुस्सा अंदर ही अंदर तप रहा है, यदि प्रशासन ने निष्पक्ष कार्यवाही नहीं की तो कभी भी इन गांव वालों का गुस्सा भड़क सकता है और कोई खूनी शक्ल अख्तियार कर सकता है।
ये ग्रामीण कई नेताओं का कैमरे पर खुलेआम नाम ले रहे हैं और बता रहे हैं कि पंचायती चुनाव में वो न देने से नाराज नेताओं ने षड़यंत्र रचा और कागजी जाल में फंसा एसडीएम से मकान गिरवा दिया।
गांव के वर्तमान जीते प्रधान ने डाइनामाइट न्यूज़ को बताया कि इस गांव में डेढ़ एकड़ खलियान की जमीन है, जिस पर लगभग 20 लोगों का अतिक्रमण है लेकिन वोट न देने की वजह से सिर्फ इसी महिला को द्वेष भावना से टारगेट कर इसके मकान को जबरन बुलडोजर से गिरा दिया गया, यदि अतिक्रमण हटाना था तो सभी का क्यों नहीं गिराया गया?
गांव वालों का कहना है कि इसी जमीन पर महिला का मकान सत्तर साल से था, जर्जर होने पर इसे नया बनाया जा रहा था। महिला ने 5लाख रुपये घर बनवाने के चक्कर मे लेने वाले कई ईश्वतखोरो का नाम बता रही है जो उसी गांव के है।

एसडीएम का पक्ष

एसडीएम निचलौल प्रमोद कुमार का कहना है कि खलिहान की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर मकान बनाया गया था, इसलिए इसे ध्वस्त किया गया है। उन्होंने इस बात से साफ इंकार किया कि उनके उपर किसी तरह का हमला ग्रामीणों द्वारा किया गया है।
पीड़ित महिलाओं ने बताया कि SDM निचलौल प्रमोद कुमार ने न तो उनकी बात को सुना और तो और उन्होंने हमें लात से मारा और धक्का दिया फिर जाकर हमने ईंट-पत्थर चलाये।
बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन ग्रामीणों के आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा? क्या जिन लोगों ने वोट नहीं दिया उनका उत्पीड़न सत्ताधारी नेताओं के दबाव में अफसर करते रहेंगे?

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