*संत श्रीराम बालक दास जी द्वारा*

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प्रेस हेतु

2 अक्टूबर
संत श्री राम बालक दास जी द्वारा संचालित सीता रसोई संचालन ग्रुप में, आज पावन ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा में बाबा जी ने 2 अक्टूबर गांधी जयंती एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर सभी को शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की,
इस विशेष राष्ट्रीय दिवस पर बाबा जी ने सभी को आज के दिन के महत्व से विदित कराते हुए कहा कि हमें महान पुरुषों के चरित्र से बहुत कुछ सीखना चाहिए धरती के लाल, लाल बहादुर शास्त्री जिन्होंने हमें आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनके विचार पूर्णरूपेण क्रांतिकारी रहे हैं एवं जय जवान जय किसान का नारा उन्होंने हमारे देश को दिया इसी नारे ने आज संपूर्ण देश को प्रगति की नई दिशा प्रदान की जिससे हमारे देश के जीवन रेखा किसानों के महत्व एवं जीवन को आगे बढ़ाने वाली ऊर्जा युवा वर्ग को महत्व दिया गया
महात्मा गांधी जी को पुण्य स्मरण करके बाबा जी ने कहा कि ऐसा नहीं कि भारतवर्ष में कोई बापूजी से परिचित ना हो परंतु उनको अपने जीवन में उतारने हेतु आवश्यक है कि हम उन्हें पढ़े जाने समझे उनके लिए हम उनके द्वारा रचित हरिजन डायरी, गांधीजी की आत्मकथा, सत्य के प्रयोग, रामधारी सिंह दिनकर, पियूष गोयंकाजी बहुत से ऐसे कवि हैं जिन्होंने बापू जी के जीवन को कलमबद्ध किया है यह संस्मरण हमें सदा प्रेरित करते हैं
बापू जी का कहना था कि जो व्यक्ति अपने कर्मद्रियों पर नियंत्रण नहीं कर सकता तो वह ज्ञानेंद्रियों पर भी नियंत्रण नहीं कर सकता इसीलिए कभी-कभी बापूजी 1 महीने के लिए तो कभी कभी 6 महीने तक के लिए नमक मीठा का त्याग कर देते थे उनके सत्य के प्रयोग द्वारा युवा पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने मिलता है कि कैसे ज्ञानेंद्रियों कर्मेद्रियों पर नियंत्रण किया जाता है इसके लिए बहुत से प्रयोग उन्होंने कीये अहिंसा को परम धर्म माना अपने परिवार के साथ चलते हुए परमार्थी जीवन को कैसे जीना, एक फक्कड़ साधू की तरह जीना, आज के नेताओं के लिए बापूजी तो आदर्श होना चाहिए केवल महात्मा गांधी की जय बोलने उनकी टोपी लगा लेने से ही सब कुछ नहीं हो जाता, उनके सिद्धांत आपके जीवन में आने चाहिए यहां बहुत ही शर्म व दुखद कि बात है कि आज के लोग गांधीजी के आदर्श और सिद्धांतों को बिल्कुल नहीं मानते, गांधीजी किसी पार्टी विशेष के नहीं देश के हर राजनीतिक व्यक्ति के आदर्श हो सकते हैं जो भी व्यक्ति राजनीति में या समाज सेवा से जुड़ा है उन्हें गांधी जी की जीवनी पढ़नी चाहिए कि एक सच्चा व्यक्ति कैसा होना चाहिए उन्होंने एक फकीर का वेश धरके भारत को आजादी दिलाई लोगों को तख्त दिया और खुद सीने पर गोली खाई ऐसे महात्मा संत पुरुष के संसमरणों को यदि हम याद करें तो उनके अंश मात्र भी हमारे जीवन में आ जाए तो हमारा जीवन सुधर जाएगा
सत्संग परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए रामफल जी ने जिज्ञासा रखी थी, महर्षि विश्वामित्र जी को राज ऋषि क्यों कहा जाता है, इस विषय पर प्रकाश डालते हैं बाबा जी ने कहां की सर्वप्रथम महाराज जनक जी को राज ऋषि कहा गया निमी वंश के प्रखर राजा भगवती जगत जननी माता सीता के पिता जनक जी जिनका नाम ही जनक है जिन्होंने माता सीता को धरती से प्रकट किया उनको राजऋषी नाम से संबोधित किया गया, फिर आए महर्षि विश्वामित्र
महर्षि विश्वामित्र जी क्षत्रिय वंश के बहुत ही प्रतापी और प्रखर राजा विश्वरथ थे बहुत ही प्रतापी विद्वान राजा जितना शस्त्र का ज्ञान इतना ही शास्त्र का ज्ञान था शस्त्र शास्त्र का ज्ञान होने के कारण उन्हें भगवान परशुराम जी का ही रूप माना जाता था परंतु राजा विश्वरथ में ब्राह्मण और ब्राह्मणत्व के प्रति बहुत झुकाव था वे चाहते थे कि उन्हें ब्राह्मणत्व प्राप्त हो इसके लिए उन्होंने अपने जीवन के चौथे काल में सब कुछ त्याग कर वन में जाकर घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन कर ब्राह्मणत्व को प्राप्त करने की विनती की इसके लिए ब्रह्मा जी ने उन्हें अपना मानसपुत्र स्वीकार किया , मानस पुत्र होने के कारण वे क्षत्रिय शरीर में भी ब्राह्मण हुए, तब वन में आश्रम में विद्या अध्ययन शास्त्रों का अध्ययन कर उनका निर्माण किया उस समय बहुत अच्छे गुरुकुल का भी निर्माण उन्होंने किया वे एक वैज्ञानिक भी थे उन्होंने मंत्र से चलने वाले वाहन बाण संकल्प से चलने वाले रथ पुष्पक विमान रावण को मारने हेतु राम जी ने जी अमोघ बानो का प्रयोग किया वह विश्वामित्र के द्वारा ही प्रदान किया गया था कहा जाता है कि गौ माता की नकल से भैंस का सृजन भी विश्वामित्र जी के द्वारा ही किया गया मनुष्य का निर्माण भी वे कर रहे थे इस रचना के द्वारा उन्होंने नारियल का निर्माण किया इस प्रकार महर्षि विश्वामित्र जी गुरु होते हुए ब्राह्मण होते हुए एक वैज्ञानिक भी थे
इस प्रकार आज का आनंद दायक सत्संग सम्पन्न हुआ
जय गौ माता जय गोपाल
जय सियाराम

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