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अखण्ड सौभाग्य के लिए करवा चौथ का व्रत—————————————–महराजगंज,4 नवम्बर 2020 बुधवार आर्या ब्रत अंक ज्योतिष बिज्ञान केंद्र संस्थापक आचार्य लोकनाथ तिवारी ने बताया कि वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार 4 नवम्बर दिन बुधवार को सूर्योदय 6 बजकर 30 मिनट पर और चतुर्थी तिथि का मान सम्पूर्ण दिन और रात 2 बजकर 8 मिनट तक। चतुर्थी तिथि के दिन बुधवार और मृगशिरा नक्षत्र होने से अमृत नाम का औदायिक योग भी निर्मित हो गया है। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र पूरे दिन और रात्रि शेष 3 बजे तक हैं। व्रतार्चन के लिए उत्तम श्रेष्ठ दिन के रूप मे परिगणित रहेगा। इस दिन चन्द्रोदय रात मे 7 बजकर 57 मिनट पर होगा।इसी समय चन्द्रमा को अर्घ्य प्रदान किया जायेगा। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन किया जाता है।पति के दीर्घायु और एवं अखण्ड सौभाग्य के लिए, इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवा चौथ में गणेश चतुर्थी के व्रत की तरह दिन भर उपवास रखकर रात मे चन्द्रमा को अर्घ्य देने के उपरान्त ही भोजन या फलाहार का वितान है। यह व्रत सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने परिवार के प्रति के अनुसार करती हैं, लेकिन बहुसंख्यक स्त्रियाॅ निराहार के बाद ही इसे करती हैं। सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी आयु, स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना से करती हैं। इस व्रत को 12 या 16 वर्ष तक लगातार किया जाता है।
इस दिन स्त्रियाँ पूर्ण सुहागिन का रूप धारण कर, वस्त्राभूषण को पहन कर भगवान रजनीश से अपने अखण्ड सुहाग की प्रार्थना करती है शिव पार्वती जी की पूजा इस लिये की जाती है कि जिस प्रकार शैलपुत्री पार्वती ने घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया वैसे उन्हें भी मिले।
सौभाग्य का संकल्प लेकर दिन भर निराहार रहें।

“ऊॅ शिवायै नमः-से पार्वती जी की,

ऊॅ नमः शिवाय-से शिव जी की,

ऊॅ षण्मुखाय नमः -से कार्तिकेय जी की,

ऊॅ गणेशार्चन नमः -से गणेश जी की और ऊॅ सोमवार नमः -से चन्द्रमा का पूजन करें।एक लोटा और दक्षिणा समर्पण करवा चौ या स्वयं सायंकाल चन्द् होने पर चन्द् कर अर्घ्य इसके पश सुहागिनों पर सभी
-एक थाली में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं।
-पूजा चांद निकलने के एक घंटे पहले शुरु कर देनी चाहिए। इस दिन महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं।
-पूजन के समय करवा चौथ कथा जरूर सुनें या सुनाएं।
-चांद को छलनी से देखने के बाद अर्घ्य देकर चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए।
-चांद को देखने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना चाहिए।
-इस दिन बहुएं अपनी सास को थाली में मिठाई, फल, मेवे, रूपये आदि देकर उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लेती हैं।

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