नौतन में पुत्रवती महिलाओं ने रखा जीवित्पुत्रिका व्रत, रिपोर्ट – फिरोज अंसारी

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नौतन ( सीवान ) :- प्रखंड क्षेत्र के सभी हिन्दू समुदाय की सभी पुत्रवती महिलाओं ने अपने पुत्रों के लंबी उम्र के लिए गुरुवार को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा । बता दें कि यह पर्व पुत्र की दीर्घायु के लिए पूरे देश स्तर पर मनाया जाता है । यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कहीं पर इसे, जीवित्पुत्रिका, कहीं जितिया, तो कहीं जीउतिया व्रत के नाम से जानते हैं । इसमें एक दिन पूर्व में महिलाएँ स्नान और भोजन कर व्रत रखती हैं । व्रत के दौरान महिलाएं पूरे 24 घंटों तक निर्जला उपवास रखती हैं । जीवित्पुत्रिका-व्रत के साथ जीमूतवाहन की पूजा का बहुत बड़ी महत्ता बताई जाती है । बताया जाता है कि आश्विन कृष्ण अष्टमी के प्रदोषकाल में पुत्रवती महिलाएं व्रत रखकर जीमूतवाहन की पूजा करती हैं । कैलाश पर्वत पर भगवान शंकर माता पार्वती को कथा सुनाते हुए कहते हैं कि आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रखकर जो स्त्री सायं प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा करती हैं तथा कथा सुनने के बाद आचार्य को दक्षिणा देती है, वह पुत्र-पौत्रों का पूर्ण सुख प्राप्त करती है । व्रत का पारण दूसरे दिन अष्टमी तिथि की समाप्ति के पश्चात किया जाता है । इसके अलावा कहीं पर इस व्रत के पारण के बाद महिलाएं जितिया का लाल रंग का धागा गले में पहनती हैं। व्रती महिलाएं जितिया का लॉकेट भी धारण करती हैं। पूजा के दौरान सरसों का तेल और खल चढ़ाया जाता है। यह व्रत अपने नाम के अनुरूप फल देने वाला है । इसी परंपरा के अनुरूप प्रखंड क्षेत्र की सभी पुत्रवती महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा ।

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