*वाराणसी में 25 विद्यालयों की कम्पोजिट ग्रांट में धांधली*

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*वाराणसी में 25 विद्यालयों की कम्पोजिट ग्रांट में धांधली*

*वाराणसी-* जिले के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में कम्पोजिट ग्रांट के उपयोग में गड़बड़ी का मामलापकड़ में आया है। प्रदेश स्तरीय जांच टीम ने इसे पकड़ा है। ऐसे विद्यालयों की संख्या 25 है।बीएसए राकेश सिंह के मुताबिक गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार प्रधानाध्यापकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। विद्यालयों के अलग-अलग मामले हैं।कम्पोजिट ग्रांट के दुरुपयोग के मामले की जांच स्थानीयस्तर पर भी चल रही है। सीडीओ के निर्देश पिछले तीनसालों में कम्पोजिट ग्रांट के तहत हुए कार्यों की जांच हो रही है।इस मामले में कई प्रधानाध्यापकों के खिलाफ निलंबन और वेतनरोकने की कार्रवाई हो चुकी है।अधिकतर मामलों में यह पाया गया कि कम्पोजिट ग्रांट के खर्चका हिसाब-किताब प्रधानाध्यापकों के पास नहीं थी। कुछ स्कूलों में पैसा खर्च हो गया लेकिन काम न होने की शिकायत मिली। प्रत्येक मामले के लिए खंड शिक्षाधिकारियों की अलग-अलग समितियां गठित हैं।

*छात्र संख्या के आधार आवंटित होता है ग्रांट*

विद्यालयों को छात्र संख्या के आधार पर ग्रांट दिया जाता है। एक से 15 छात्र संख्या वाले विद्यालय को 12,500, 16 से 100 तक वाले को 25 हजार, 101 से 250 तक वाले को 50000, 251 से 1000 तक को 75000 और एक हजार से अधिक छात्र संख्या वाले को एक लाख रूपए वार्षिक अनुदान दिया जाता है।

*बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाता है ग्रांट*

कम्पोजिट ग्रांट के उपयोग के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से विस्तृत गाइडलाइन जारी है। इसका उपयोग बुनियादी सुविधाओं के लिए किया जाता है। इसमें दस फीसदी धनराशि स्वच्छता पर की जाएगी। इसके अलावा रंगाई-पोताई, छोटी-मोटी मरम्मत, बाला पेटिंग, अग्नि शमन यंत्र की रिफिलिंग, फर्स्ट एड बाक्स के लिए दवाइयां, दिव्यांग छात्रों के लिए टीएलए आदि खरीदने के लिए किया जा सकता है। बीएसए राकेश सिंह का कहना है कि पूर्व में कई बार निर्देश जारी हैं। जिले के अधिकतर विद्यालयों ने इसका सदुपयोग किया है। कुछ विद्यालयों में गड़बड़ी मिली है। जिस पर कार्रवाई हो रही है।

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