*जीवन में आपको उत्साह बढ़ाने वाले प्रेरक व्यक्ति भी मिलेंगे, और निराशावादी आलसी उत्साहभंजक लोग भी मिलेंगे।*

0
69

*जीवन में आपको उत्साह बढ़ाने वाले प्रेरक व्यक्ति भी मिलेंगे, और निराशावादी आलसी उत्साहभंजक लोग भी मिलेंगे। प्रेरक व्यक्तियों के साथ रहें। उत्साहभंजक लोगों से दूर रहें।*
संसार में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनके विचार सकारात्मक चिंतन वाले होते हैं। वे हमेशा स्वयं अच्छे काम करते हैं, और दूसरों को भी अच्छे काम करने के लिए सदा प्रेरित करते रहते हैं। ऐसे प्रेरक व्यक्ति स्वयं तो सुखी रहते ही हैं, साथ ही साथ, अन्य कमजोर अथवा उत्साहहीन लोगों को भी प्रेरित करके, उन्हें भी जीवन में आगे बढ़ाते तथा सुखी करते हैं। ऐसे लोग केवल प्रेरणा ही नहीं देते, बल्कि अनेक प्रकार से सहयोग देकर समाज की उन्नति भी करते हैं। कोई व्यक्ति तो निर्धन बच्चों को पुस्तकें खरीदने में आर्थिक सहायता देता है। कोई उनको मुफ्त में पढ़ा देता है। कोई उनके भोजन आदि की व्यवस्था कर देता है। कोई उनके लिए दूध की, तथा कोई उनके लिए वस्त्र आदि बनवा देता है। इसी प्रकार से कोई उत्साही व्यक्ति रोगियों की चिकित्सा करवा देता है। कोई धर्मशाला बनवा देता है। कोई आई ए एस आदि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले निर्धन विद्यार्थियों की सहायता करता है। कोई वैदिक धर्म के प्रचार में दान देता है। धन्य हैं ऐसे लोग, जो परोपकार की भावना से समाज की सेवा करते रहते हैं। *ऐसे लोगों के संपर्क में रहना चाहिए जिससे आपकी सब प्रकार की उन्नति होती रहे और एक दूसरे को परस्पर सहयोग भी मिलता रहे।*
परन्तु संसार में कुछ लोग ऐसे भी देखे जाते हैं, जो नकारात्मक चिंतन वाले होते हैं। उन्हें किसी भी जगह पर कुछ भी अच्छा नहीं दिखता। *उन्हें हर जगह समस्याएं ही दिखती हैं। समस्याएं न हों, तो भी उनका नकारात्मक चिंतन नई समस्याएं उत्पन्न कर देता है।* जिसके कारण वे स्वयं तो दुःखी रहते ही हैं, साथ ही अपने अशुद्ध एवं निराशाजनक चिंतन से, दूसरों को भी निरुत्साहित करते रहते हैं। *ऐसे लोग उत्साहभंजक कहलाते हैं।* ऐसे लोगों के साथ रहने पर, धीरे-धीरे वे अपने निराशावादी विचार आपके अंदर भी डालते जाएंगे। कुछ दिनों में आपका चिंतन भी उन के समान निराशावादी हो जाएगा। इससे आपका उत्साह धीरे-धीरे कम हो जाएगा, और आप किसी भी क्षेत्र में निश्चिंत होकर उत्साह पूर्वक पुरुषार्थ नहीं कर पाएंगे। हर जगह आशंकाएं आपको सताएंगी। जब सफलता में आशंकाग्रस्त होकर आप पूरी तरह से परिश्रम नहीं करेंगे, तो आपको आपके कार्यों में सफलता भी नहीं मिल पाएगी। *परिणाम यह होगा, कि आप भी उन जैसे निराश हताश और दुखी हो जाएंगे। आपका जीवन ही पूरी तरह से अस्त-व्यस्त तथा नष्ट हो जाएगा। इसलिए ऐसे लोगों से ज़रा बच के रहना चाहिए, दूर रहना चाहिए। ताकि ऐसे लोग आपकी हानि न कर पाएं।*
जब कभी आपको ऐसे निराशावादी लोग मिलें, और ऐसी निराशाजनक बातें करें, तब उनकी बातों पर ध्यान न दें। अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर उसकी प्राप्ति के लिए पूर्ण पुरुषार्थ करें। उत्साही लोगों के संपर्क में रहें। वे आपकी शक्ति को बढ़ाते रहेंगे। उनकी सहायता से आप अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर लेंगे। इस प्रकार से अपना चिंतन विचार योजना और व्यवहार बनाना चाहिए।
*एक बहरा व्यक्ति था। उसे कुछ भी सुनाई नहीं देता था। शरीर से भी वह दुबला पतला था।* एक बार उसे एक छोटी पहाड़ी पर चढ़ने की इच्छा हुई। उसने अपने मन में संकल्प किया और वह पहाड़ी पर चढ़ने लगा। निराशावादी लोगों ने देखा और उसे टोकना आरंभ किया। *अरे भाई, तुम दुबले-पतले हो। तुम उस पहाड़ी पर नहीं चढ़ पाओगे। इसलिए यह ख्याल अपने मन से निकाल दो, इत्यादि।*
इस प्रकार से वे लोग कहने लगे, और उस बहरे व्यक्ति का उत्साह भंग करने लगे। परंतु वह तो बहरा था। उसे तो कुछ भी सुनाई नहीं दिया। वह अपनी धुन में मस्त पहाड़ी पर चढ़ता गया। वे आलसी, उत्साहभंजक लोग देर तक चिल्लाते रहे, परंतु उनके चिल्लाने का उस बहरे व्यक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। क्योंकि उसे कुछ भी सुनाई नहीं देता था। परिणाम यह हुआ कि वह अपने संकल्प के अनुसार पहाड़ी पर चढ़ गया, और उसने अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। *बाद में उन उत्साह भंग करने वाले लोगों को पता चला कि वह व्यक्ति तो बहरा था।*
इस घटना से आप और हम सब लोग, यह शिक्षा ले सकते हैं, कि *जब निराशावादी लोग आपका भी उत्साह कम करने लगें, तो आप भी उस बहरे के समान हो जाएं। उनकी बात पर कोई ध्यान न देवें। अपने लक्ष्य की ओर उत्साह पूर्वक चलते रहें। यदि आप का लक्ष्य सही है, संविधान के अनुकूल है, और आप उत्साहपूर्वक पूर्ण पुरुषार्थ करेंगे, तो निश्चित रूप से आपको सफलता मिलेगी, जैसे उस बहरे को मिली थी।*
– *स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक।*

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here