वर्षो से जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की राह देख रहा भवानी छापर जगतौली मार्ग, रिपोर्ट – भारत भूषण श्रीवास्तव

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भाटपार रानी -: चुनाव के दौरान बड़े बड़े वादे करने के साथ ही फेंक वादे करने वाले चुनाव बाद कभी नजर ही नहीं आते इन सब चीजों से लोग भी भली-भांति परिचित हो चुके हैं । चुनाव के दौरान बिजली ,रास्ता और पीने का पानी मुख्य मुद्दा कहीं भी बन जाता है लेकिन चुनाव जितने के बाद उन्ही जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्या सुनने वाला देखने का समय ही नहीं मिलता । यही हाल है तहसील क्षेत्र के भवानी छापर से बिहार के जगतौली को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग का जो वर्षों से अपने जिर्णोधार का रास्ता देख रहा है ।हालात तो ऐसे हैं कि पहले पिच बनी सड़क पिछले कई सालों से जर्जर पड़ा है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि या किसी विभागीय अधिकारी की नजर वहां पड़ती नहीं। जिससे हालात ये हो गया है कि हर रोज साइकल या मोटरसाइकिल से गिरकर लोग घायल हो जाते हैं । लेकिन जनप्रतिनिधियों को क्या जनता ने वोट दे दिया तिलक लग गई साहब तो आराम से अपने आप के जिर्णोधार में लगे पड़े हैं । ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर इस जर्जर रास्ते को दुरुस्त कौन करायेगा क्या मतदान के बाद जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी कुछ नहीं बनती । क्या किसी अधिकारी के पास भी समय नहीं , ऐसे में बार बार गढ्ढा मुक्त सड़क की फरमान जारी होने के बाद भी इस सड़क पर नजर न पड़ना क्या अधिकारियों की लापरवाही नहीं दर्शाता । वहीं चीजे अब फिर देखने को मिल रही है पंचायत स्तर पर चुनाव को लेकर जहां सरगर्मियां तेज है वहीं बड़े बड़े वादे करने वालों की कमी नहीं है । अब देखना यही है कि जनता किसपर कितना भरोसा करती है ।

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